उत्तराखंड की तहसीलों में पिछड़ी जाति के प्रमाण पत्र बनाने वाले आवेदकों से कहा जा रहा है कि 1950 से रहने का सबूत लगाओ या 1950 के भूमि अभिलेख संलग्न कीजिये ये तथ्य पूरी तरह गलत और भ्रामक है. पूछने पर बताया जाता है कि आरक्षण 1950 से लागू हुआ इसलिए 10-08-1950 का रिकार्ड लाइए. वास्तव में ये तथ्य गलत है वास्तविकता ये है कि आरक्षण के निम्न नोटिफिकेशन हुए हैं
10-08-1950 को अनुसूचित जाति का नोटिफिकेशन हुआ है
06-09-1950 को अनुसूचित जन जाति का नोटिफिकेशन हुआ है
10-09-1993 को पिछड़ी जाति का नोटिफिकेशन हुआ है
इसलिए अनुसूचित जाति या जनजाति से नोटिफिकेशन के दिनांक के अभिलेख मांगे जाये तो समझ में आता है लेकिन पिछड़ी जाति से 1993 के अभिलेख न मांगकर 1950 के अभिलेख क्यों मांगे जा रहे हैं? ये पिछडो के खिलाफ साज़िश है
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