Sunday, December 29, 2019

Govt letter पिछड़ी जाति सर्वे में की गयी है साज़िश - सबूत सहित



पिछड़ी जाति सर्वे किये जाने हेतु  डाक्टर आर एस टोलिया तत्कालीन मुख्या सचिव ने ५ मई २००५ को ने पिछड़ी जाति सर्वे किये जाने हेतु एक शासनादेश जारी किया था जिसमे ग्रामीण क्षेत्रो में पिछड़ी जाति का सर्वे किये जाने हेतु शासनादेश जारी किया था जिसकी प्रति यहाँ लगाईं गयी है जिसमे स्पष्ट है पंचायतो में आरक्षण की स्थिति को स्पष्ट करने और पिछड़ी जाति की सीटों को आरक्षित करने के उद्देश्य से ये रेपिड  सर्वे कराया था









सर्वे किये जाने के बाद पंचायतो की सीटों को आरक्षित किया गया और बाद में समाज कल्याण विभाग ने इस रेपिड सर्वे को आधार मानकर प्रदेश में १४% आरक्षण पिछड़ी जाति के लिए लागू कर दिया .

१  इसमें आपत्ति जनक बात ये है कि नगरीय क्षेत्र में पिछड़ी जाति की गणना किये बगैर प्रदेश में आरक्षण लागू किया कैसे?

२ इसमें पिछड़ी जाति कि गणना सही तरीके से नहीं की गयी , उत्तराखंड में पिछड़ी जाति लोहार, बढ़ई, रूडिया, मिस्त्री, औजी, टमटा आदि जातियों को अनुसूचित जाति में शिल्पकार में फर्जी तरीके से दिखाया गया है जबकि उनको पिछड़ी जाति में दर्ज नहीं किया गया है जिससे पिछड़ी  जाति की जनसँख्या को षड्यंत्रकारी तरीके से कम दिखाया गया है 

३ चूंकि नगरीय क्षेत्र में 2001 की जनगणना में कुल प्रदेश कि जनसँख्या 8489349 थी जिसमे से शहरी जनसंख्या 2179074 थी अर्थात कुल जनसँख्या का लगभग 25% , इस तरह इस 25% जनसँख्या को सर्वे से छोड़ दिया गया है और 14% आरक्षण पिछड़ी जाति को दिया गया है जबकि ये अधिक होना चाहिए था, जनसँख्या का आंकड़ा आप ऊपर इस फोटो में देख सकते हैं 

इससे स्पष्ट है कि जान बूझकर पिछडो की जनसँख्या को कम दिखाया जा रहा है .

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