पिछड़ी जाति के लोगो को परेशान करने के उद्देश्य से कई बार विभाग और लोक सेवा आयोग उत्तराखंड द्वारा समय समय पर नवीनतम जाति प्रमाण पत्र कि मांग की जाती है जो कि गलत है जब इन विभागों से पूछा जाता है कि नवीनतम प्रमाण पत्र मांगने के पीछे क्या कारण है तो वे इसका कोई लिखित उत्तर नहीं देते. वास्तविकता ये है कि जाति प्रमाण पत्र कि वैद्यता निर्धारित करने वाला कोई शासनादेश नहीं है सब मनमाने तरीके से माँगा जाता है. ओबीसी प्रमाण पत्र के मामले में एक दूसरा तथ्य है क्रीमी लेयर का, जिसको पिछड़े वर्ग का लाभ नहीं मिलता. क्रीमी लेयर के बारे में जानने के लिए देखें
http://www.ncbc.nic.in/Creamylayer.html बस क्रीमी लेयर के कारण से ही नवीनतम प्रमाण पत्र माँगा जाता है , दूसरा तथ्य यह है कि कई लोगो को पिछड़ी जाति का प्रमाण पत्र तब भी नहीं दिया जाता है जबकि उनका पूर्व का प्रमाण पत्र बना होता है जबकि इस मेमोरेंडम नीचे में लिखा है व्यक्ति कि जाति कभी नहीं बदलती यानी उसकी जाति का भाग सदैव शाश्वत रहता है जबकि सिर्फ क्रीमी लेयर का भाग बदलता है
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