चार साल पहले शिल्पकार बनी थीं 47 उपजातियां, अब हटाएगी सरकार
Updated: September 27, 2017, 1:13 PM IST
प्रदेश सरकार शिल्पकार जाति में शामिल की गईं 47 उपजातियों को लेकर जारी अधिसूचनाओं को निरस्त कर सकती है. पूर्व सरकार में ये अधिसूचनाएं जारी हुई थीं, मगर अधिसूचनाओं को लेकर हुई शिकायतों के बाबत न्याय विभाग ने सरकार को जो परामर्श दिया है, उससे खलबली मची है.
न्याय विभाग के परामर्श के मुताबिक, प्रदेश सरकार को अनुसूचित जाति की सूची में उपजातियों को शामिल करने का संवैधानिक अधिकार नहीं था. न्याय विभाग ने अधिसूचनाओं को निरस्त करने का परामर्श दिया है.
विभाग असमंजस में है और प्रकरण की फाइल अपर मुख्य सचिव, समाज कल्याण डॉक्टर रणवीर सिंह के पास पहुंची है. उनके मुताबिक, पूरे प्रकरण के अध्ययन के उपरांत ही निर्णय लिया जाएगा.
कायदे से अनुसूचित जाति का दर्जा देने का अधिकार केंद्र सरकार को है. इसके लिए देश की संसद में बाकायदा प्रस्ताव पारित होता है.
राज्य सरकार को इसका एक प्रस्ताव केंद्र को भेजना था. मगर वर्ष 2013 में पूर्व सरकार में तत्कालीन प्रमुख सचिव, समाज कल्याण एस राजू ने 16 दिसंबर 2013 को पहली अधिसूचना जारी की, जिसमें 38 उपजातियों को शिल्पकार जाति में शामिल किया गया.
उसके बाद 30 जनवरी 2014 को नौ उपजातियों को सूची में शामिल करने की दूसरी अधिसूचना जारी की. इनमें से कई जातियां अनुसूचित जाति की श्रेणी में पहले से शामिल थीं. ऐसे में कतिपय उपजातियों को लेकर अधिसूचनाएं जारी करने के औचित्य पर सवाल उठ रहे हैं.

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